तुम्हारे साथ प्रेम के वो दिन मैंने देखा की एक चिड़िया की तरह फुर्र हो गया दूर टंगा आसमान में एक तारा मुझे देखता रहा तुम्हारी खाली आँखों में उस चिड़िया की परछाई उभर आई कई बार तुम्हारे साथ महसूस किया कि दुनिया में प्रेम करने की बहुत सी जगहे है जहाँ प्रेम उगता है घास की तरह तुमसे दूर होकर जाना प्रेम करने की बहुत कम जगहे बची है मखमली घास पर जगह जगह गिरे है चिड़िया के नाजुक पंख मुझे लगता है अब प्रेम मेरे लिए आसमान में टांगे गए अकेले तारे की तरह है जिसकी टिमटिमाती रोशनी में आँखे खोजती है तुम्हारा प्रेम सच है प्रेम के हर रूप में भाषा आड़े आ ही जाती है शब्द अक्सर दे जाते है धोखा मात्राएँ नहीं उठा पाती है भार मौन भी करता है अभिव्यक्ति बनता है प्रेम की शक्ति जीवन के सारे ताप इसमें उतर आते है चुपचाप चला आता है सारा अंधेरा याद की तरह हर आँखों ने पढ़ी अपनी भाषा हाथो ने उठाये ग्रंथ और सबने मिलकर हारकर एक दिन एलान कर दिया - नहीं गढ़ा जा सकता है प्रेम का निर्धारित व्याकरण। --गरिमा सिंह
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