रात को दिन, दिन को पहर कर दिया एक तेरे प्यार ने क्या से क्या कर दिया। ------ खुल गए तेरे गेसू जो अंदाज से आसमानो पे बदली यूँ छाने लगी, खुल गई होंठ की पंखुड़ी जो तेरे कुछ कलियाँ यूँ ही मुस्कुराने लगी, ---- आज पतझड़ को तुमने चमन कर दिया, एक तेरे प्यार ने क्या से क्या कर दिया। ---- चाँद उतरा मेरे आईने में फखत रौशनी गीत यूँ गुनगुनाने लगी, जुगनुओं ने की ऐसी कारीगरी रात आँचल को जैसे सजाने लगी, -------- धरा को ही तुमने, गगन कर दिया, एक तेरे प्यार ने क्या से क्या कर दिया। ------ वक़्त ठहरा रहा पांव चलते रहे रास्तों में मुझे बेबसी सी लगी, तुझको ढूँढा हर इक चेहरे में यूँ हर आगोश में बस कमी सी लगी, ----= फेरकर यूँ निगाहें करम कर दिया, एक तेरे प्यार ने क्या से क्या कर दिया। ---Garima singh
बहुत ही सुन्दर रचनाएं वाह!
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