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लिखते हुए प्रेम

 तुमने मुझसे कहा -


तुम मुझे अच्छी लगती हो
मैं तुमसे प्यार करता हूँ
मै चुप रही
एकदम चुप
मरने के बाद जैसे कोई चुप हो जाता है

तुमने कहा -
जवाब दो, कुछ कहो

मैंने कहा -तुम भी मुझे
अच्छे लगते हो
लेकिन मै तुमसे प्यार नहीं कर पाऊँगी
मेरे दोस्त,
क्योंकि मैंने जब भी तुम्हे याद किया
मेरे माथे की बिंदी बहुत भारी
लगने लगी, एक लाल रंग की रेखा
ठीक भौहो के बीच लुढ़क गई

कई बार तुम्हारा नाम
कागज पर यूँ ही लिखते हुए
चूड़ियों ने मात्राओं की दिशा को बदल दिया

तुम्हारे घर की ओर जाने वाले रास्ते पर
अक्सर बज उठती है पायल
आंखे गढ़ती हैं
पाप और पुण्य की परिभाषा

तुम्हारे चेहरे को
एक परिचित चेहरा ढक लेता है रोज
जिसे मै पूरे जोर से धकेलती हूँ
बचाती हूँ तुम्हारी दो आँखे
जिसमें छुपाती हूँ अनकहा प्रेम

मेरे दोस्त!मै तुम्हे नहीं बता सकती
कैसे कई हिस्सों मे रोज बट जाता है मेरा प्रेम
और तुम्हारे हिस्से का
मै छुपा लेती हूँ अँधेरी खोह मे।

--गरिमा सिंह





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