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जाना मात्र क्रिया नहीं

 जाना' मात्र क्रिया नहीं


मै तुम्हे रोक सकती थी
दूर जाते हुए
पकड़ सकती थी तुम्हारा हाथ
क्यूंकि तुम नहीं गए थे चुपके से तथागत की तरह
तुम्हारे चले जाने का बोध था मुझे

मुझे इंतजार था कि तुम
मुड़कर देखोगे एक बार पीछे
तुम जान पाओगे कुछ जगहे
छोड़े जाने के लिए नहीं होती हैं
कभी छूटती भी नहीं है
दूर जाने पर चली आती है तुम्हारे पास

तुम मुड़ना नहीं जानते थे
ऐसे समय मे
जब सब कुछ क्रियाशील है
'रुक जाना 'एक निरर्थक क्रिया हो सकती है
एक प्रगतिशील आदमी के लिए

मै तुम्हे रोक भी लेती
यदि तुम नहीं जानते कि तुम्हारा जाना
मात्र क्रिया नहीं है
मेरे जीवन की सबसे दुःखद
घटना हो सकती है

अब जबकि तुम इतना दूर हो
तुम्हारा होना नहीं पैदा करता
मेरे भीतर कोई शोर
निर्वात मे नहीं आती है कोई आवाज़
ऐसे समय मे तुम्हारा लौट आना
इस सदी के इतिहास की
सबसे क्रन्तिकारी घटना बन सकती है।

             गरिमा सिंह

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