क्षण === चलते हुए अचानक कुछ घटित होता है और आदमी भूल जाता है चलना बैठता है और उसको महसूस करता है जो उसके भीतर ही पैदा हुआ सहसा, तीव्रता से, अर्जुन के भीतर महाभारत के युद्ध मे अचानक आया रख दिया अस्त्र, जिससे गीता का ज्ञान प्रकट हुआ उस एक क्षण ने विराट ज्ञान से भर दिया आकाश एक दिन सिद्धार्थ के भी अंदर उतर आया यह क्षण रास्ते मे बीमार दुःखी वृद्ध को देखकर वो भी भूल गए चलना अभी तक नींद मे चलता हुआ आदमी जाग गया था किसी के अंदर कई बार जागता है हर बार घटित होती है एक क्रांति दूसरी बार सिद्धार्थ के अंदर उतरा पीपल के पेड़ के सहारे गहन अँधेरी रात मे बिजली की तरह अंतर्मन कौध गया वो बन गए बुद्ध बुद्ध के भीतर ये क्षण रोज उतरता है जिसे वो देखते थे मुस्कुरा कर वो भी जगता था एक बार क्षण भर को ऐसे ही सम्राट अशोक के मन मे कलिंग के युद्ध के दौरान पैदा हुआ ये क्षण रख दिया अस्त्र संघ की शरण मे लौट आया उस प्रकाश से समुद्र पार भी जगमगाया कहते है ये क्षण नितांत अकेले मे घटित होता है जब आँखे बाहर नहीं अंदर की ओर कर रही हो यात्रा कभी कभी जीवन के अंतिम समय मे घटित होता ...
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