देश का रोना एक बिल्ली के रोने से उभर आईं हैं टेढ़ी -मेढ़ी लकीरें मुहल्ले भर की औरतों के माथे पर होंठ बुदबुदा रहें प्रार्थना के कमजोर शब्द आँखे टिकी है किसी साकार पर वो बचना चाहती हैं अपशकुन से जो पैदा होती है बिल्ली के रोने मात्र से वह नहीं रो सकती भूख से? किसी वेदना से? चिड़ियाँ मडराती है किसी पेड़ के पास चीं चीं के शोर से भर जाता है आसमान कुछ स्त्रियां रोती हैं झुण्ड में दुःख अलग होने पर भी उनकी संवेदना नहीं समाती भाषा में अकेले पार्क में बैठा बूढा आदमी कुर्ते की बांह से पोछता है आंसू देखते हुए दूर छोटा बच्चा वो रोज रख लेता है सिर पर हाथ पढ़ते हुए सुबह का अख़बार टहलता है सुनते हुए कोई पुराना गाना भरते हुए लम्बी सांस पिता बगीचे में ताकते हैं कनेर के सबसे ऊपरी शाख पर खिला फूल माँ रोती है सर्दी के बहाने से कवि अपनी कविता में उगा रहा झरबेरी के पेड़ जिससे उलझते हैं उसके कपड़े चलाते हुए विचारों की कैंची निर्धारित करता है हँसने -रोने का समीकरण विषुवतीय वनों में सुलग रही है आग ध्रुवों पर बर्फ धीरे -धीरे पिघल रही है भूगोलवेत्ताओं के माथे पर उभर रही है नसें ओजोन प...
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