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सपने

 सपनें


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सपने जिंदगी तो नहीं,
लेकिन जिंदगी के लिए
जरूरी से है सपने।
कभी नींद में भागते है
अधूरी ख्वाहिश को लेकर,
कभी नींद से जगाते है सपने।
कभी पलकों पर झिलमिलाते है
अनकही बातों की तरह,
जब हो उदासी जीवन मे
नई राह दिखाते है सपने।
तुम उदास हो तो उदास होते है,
तुम्हारे साथ नाचते गाते है सपने।
तुम्हारे मन को खाली कर
अपना ही बोझ उठाते है सपने।
कभी' कबीर 'की बानी बनकर
मन को झकझोर जाते है,
कभी मीरा के प्रेम जैसे
सताते है सपने।
कभी गुजर जाते है मन की
गलियों से चुपचाप,
कभी समंदर की लहरों सा
डराते है सपने।
मुझे खींच लाते है बनकर इबादत
तुम्हे भी खुदा सा बनाते है सपने।
Garima singh ------



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