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कुछ हिंदी गज़ले :जो प्रेम और सामाजिक भाव से उभरी है

 उठेगी लहरें बनकर फौलाद, तुमने समंदर नहीं देखा। 

शायद तुम्हारे शहर ने तबाही का मंजर नहीं देखा।

ये आतिशे कर देंगी राख तुम्हारा भी घर,
इसमें छुपी है आग, तुमने अंदर नहीं देखा।

रोज करके वादे, खुद ही मुकर जायेंगे,
तुमने अभी समाज के पैगम्बर नहीं देखा।

गर्दिश मे भी ज़ब लौट आया वो संभलकर,
उसने तारों को भी फिर मुड़कर नहीं देखा।

लड़ता रहा वो जंग खुद के ही जज़्बातों से,
उसने अपनों के हाथ का खंजर नहीं देखा।

अपनी ही जीती बाजी हार आया गैरों के लिए,
तुमने उसके जैसा कभी सिकंदर नहीं देखा।

(2)



इंसान होकर इंसानियत से मुकर जाओगे?
या आदमियत की शक्ल में सवंर जाओगे?

बड़ी विषैली हो गयी है तुम्हारे शहर की हवाएं,
क्या बिना सांस लिए ही तुम मर जाओगे?

कब से दरवाजे पर लगी है बूढ़ी माँ की निगाहें,
क्या उसकी नजरों से बचकर तुम शहर जाओगे?

कहीं तो रुकेगा, तुम्हारी ख्वाहिशों का कारवां,
या कब्रिस्तान से निकलकर फिर घर जाओगे?

वो बच्चे जो खेलते है तुम्हारे गलियारों में,
क्या उनके सपनों से भी अब मुकर जाओगे?

अपनी ही लाश को कांधे पर रखकर
फिरते हो हर रोज, अब किधर जाओगे?

बड़ी दूर चले आये हो, तुम अपनी ही हया से,
किसी की आँख से गिरकर क्या बिखर जाओगे?

कौन देगा तुम्हे सजा गुनहगार होने की,
सजा की शक्ल में क्या खुद बदल जाओगे?
(3)








यह फूल जो मुरझा गया है आज,
इस पर भी कभी बहार आई होगी।

ये आँखे जो निहारती हैं आकाश को,
इनमे भी कोई गज़ल समायी होगी।

तलवारों पर लिखी है जिसकी विजयगाथा,
उसने भी फूलों से मात खायी होगी।

शांति के लिए जरूरी है चंद अल्फाज़,
ये ख़बर किसी मसीहा ने फैलायी होगी।

अपना आशियां जला तो रोते हो क्यों,
तुमने भी किसी घर मे आग लगायी होगी।
( 4)






खुद की तलाश मे निकलते रहे।
कभी रोते रहे कभी हँसते रहे।

चाँद से थी उसकी यारी फखत,
जुगनू के लिए जो तरसते रहे।

हाथ मे अब उन्ही के बंदूक है,
वो बच्चे जो तितली पकड़ते रहे।

बेबसी चेहरे से झलक जाती है,
वो सरेराह मुखौटा बदलते रहे।

ओढ़ ली हमने चादर ख़ामोशी की,
और तन्हा अपनों मे चलते रहे।
-- Garima singh


गरिमा सिंह
Email -garimasingh9648@.com।









टिप्पणियाँ

  1. *कब से दरवाजे पर लगी है बूढ़ी माँ की निगाहें,
    क्या उसकी नजरों से बचकर तुम शहर जाओगे?*
    बहुत सुन्दर, बहुत-बहुत बधाई 👌👌👍👍👍

    जवाब देंहटाएं
  2. खुद की तलाश मे निकलते रहे।
    कभी रोते रहे कभी हँसते रहे। 😏👌
    गरिमा दीदी आपकी दिन प्रतिदिन शब्द सिलेक्शन और राइमिंग अच्छी होती जा रही है बहुत अच्छा 👏👏👏

    जवाब देंहटाएं

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