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हिंदी कविता : स्वरचित और मौलिक (चाँद से पूछो )



चाँद से पूछो 
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कैसे रोज आवारा सा 
निकल पड़ता है, 
आकाश की गलियों के चक्कर लगाने --
फेरी वाले की तरह, 
घर -घर जाकर बेचता हैचांदनी, 
झोपडी से महल तक -
खोजता है दुख दर्द, 
माँ डाटती है ' करती है रोज 
हज़ारो सवाल, 
चाँद रोज निकलता है -पूछने 
तुम्हारा दर्द, बहुत लोग देते 
है उलाहने, 
कभी भेजते है अपनी प्रेयसी 
को सन्देश, 
कोई देखता है किसी बिछड़े का प्रतिबिम्ब, 
कोई मांगता है मन्नत, 
चाँद सबकी सुनता है, 
अपनी गठरी से एक तारा तुम्हारी 
ओर फेंकता है, 
मिल जाती है मुँह मांगी मुराद तुम्हे, 
तुमसे बदले में  बिना कुछ लिए, 
चुप चाप अपने हाथों से 
सब कुछ बांध कर उठा लेता 
है, जो तुमने दिया, ले जाकर माँ 
के सामने पटक देता है, 
माँ करती है गठरी खाली, 
रात भर की कमाई को 
दिन में अलग अलग, 
रखता है, जिससे बूढ़ी दादी सूत 
 कात कर बना देती है, चदरिया, 
और एक झोला, 
जिसे लेकर वह फिर 
 रात में निकल जाता है, 
खाली हाथ सबके दर्द बटोरने। 
सबकी ख़ुशी में नाचने। 

Garima singh 


आप सब लोगो के लिए प्रस्तुत एक कविता  , जिसे लिखकर मन को कुछ सुकून मिला। बहुत कुछ ऐसा जीवन मे आपके आस पास रोजमर्रा के जीवन में घटित होता है जिसे आप सीधे व्यक्त करने में स्वयं को असमर्थ महसूस करते है, लेकिन जिसे व्यक्त करना आवश्यक होता है,। ऐसे भाव कभी कभी साहित्य के माध्यम से प्रकट होते है जो आवश्यक और अपरिहार्य है। 



मै सहेज कर रखूंगी,
तुम्हारी यादें,
जो तेरे बगैर भी मेरी है,
कुछ शब्द,
जो मेरे आकाश मे शामिल है,
वो खनकती सी हँसी,
जो मेरे कानो को आज
भी आस पास होने का भरम
दे जाते है,
कुछ किये हुए वादे,
जो मेरे हाथो को थाम कर किया था,
जिसे सुनकर मेरा मन आज
की ही तरह काँपा था,
और गिर गया था वो फूल,
जो तुमने बड़े प्यार से थमाया था,
इतना ही नहीं, बहुत कुछ
जो तुम्हारी आँखों ने कहा था,
आज भी एक एक हर्फ़ मेरी
जेहन मे ताज़ा है,
मै सब याद रखूंगी,
सब कुछ, जो तुमने
दिया, शायद तुम्हे कल
यकीन न आये मेरी बातों पर,
मेरा प्यार तुम्हे छलावा लगे,
बस इतना करना,
मेरे साथ बिताये लम्हों को
याद करना, मेरे याद मे खोकर
खुद से पूछना, क्या वो पल
झूठ था,
यकीन है मुझे मै फिर तुम्हे
याद आउंगी, तुम्हारी आँखें
मुझे दूर तलक खोज आएँगी,
फर्क इतना होगा तब मै तुम्हारे
सामने नहीं होउंगी
खो जाऊँगी, इस क्षितिज मे
तुम्हारी ही बनकर, तुम्हारे
इन्तजार मे।
---Garima singh



टिप्पणियाँ

  1. बहुत उपयोगी विचार और गजल 👌👌

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  2. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति 👍👌👌

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर ! चांद को मोती बनाकर माला में पिरोया है, अलग-अलग-अलग रंगों के मोती 👌👌👌

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  4. " चांद से पूछो" बहुत ही सुंदर👌👌

    जवाब देंहटाएं

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