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फ़रवरी, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कुछ हिंदी कविताएं :जो आपको सोचने पर मजबूर कर देंगी

 एक दिन  ===== एक दिन कैदी निकल आएंगे जेलों से, तोड़ देंगे सलाखें, तब तुम्हारी साजिशे उन्हें नहीं कर पाएंगी दूर आदमी बन जायेंगे एक दिन परिंदे लाँघ जायेंगे दीवारें, पूरे जोर से उड़ेंगे मैदानों की ओर, जहाँ नहीं होगी जेल दीवार, और पिंजरा बदल जायेगा सभी कुछ एक दिन। -Garima singh एक शर्त ===== आदमी और औरत बनाते है एक घर बनाते है दरवाजे, खिड़कियां रोशनदान बिछाते है गलीचे सजाते है गुलदस्ते, धीरे -धीरे आदमी और औरत के बीच आ जाती है दीवार, बंद हो जाते है दरवाजे, खो जाते है खिड़कियां और रोशनदान, सही यही है घर को बनाते हुए सजाते हुए, पहली शर्त है आदमी का आदमी से प्यार करना,। Garima singh भटकाव  ===== अक्सर सीधे -सीधे रास्ते पर चलता हुआ आदमी एक दिन निकल जाता है बहुत दूर जहाँ से रास्ते गंतव्य को नहीं जाते, वो खड़ा होकर सोचता है वापस आने को, पीछे मुड़ कर देखता है, कदम साथ देते है कुछ दूर वापस आने पर एक रास्ता और मिल जाता है, बहुत सोच समझ कर उस पर बढ़ जाता है धीरे -धीरे उसके पैर अनजान रास्तो पर चलने कोअभ्यस्त ह...

एक प्रेममय स्वरचित गीत :जो मन को प्रेमभाव से भर देगा

 तुम बिन कैसे गीत सुनाऊं  मन को फिर कैसे समझाऊं। गीत तुम्हारे राग तुम्हारे जीवन के सब स्वांग तुम्हारे तुम से रोना तुम से हसना तुम बिन जीवन कितना सूना कैसे तुम बिन साज सजाऊं मन को फिर कैसे समझांऊ। सपनो के हर बिम्ब मे तुम हो जीवन के हर लय मे तुम हो साँसो की ये डोर तुम्ही से तुम बिन जीवन पल -पल रीता कैसे तुम बिन फिर मुस्काउ मन कैसे फिर समझाऊ। मन के सारे गीत गुजर गए जीवन के सब मीत मुकर गए जीवन की हर छोटी बाते छंदो जैसे हमको कर गए दरिया का पानी भी साथी धीरे -धीरे यूं उतर गए कैसे तुम बिन फिर मुस्काउं मन को फिर कैसे समझाऊ। भूली बिसरी सारी यादें जीवन को बहला जाती है मन सलिला को तेरी यादें पत्थर सा लहरा जाती है। विचलित मन चंचल सा जीवन झंझा भरी कहानी लेकर जीवन पथ पर कैसे जाऊं मन को फिर कैसे समझाऊं। गरिमा सिंह (2)    (एक कविता जिसके माध्यम से अपने अन्तः मन की गहरी यात्रा का संकेत है, मनुष्य पूरे संसार को जानने और अपने अधीन करने को लालायित होता है, बाहर की सभी चीजों को जानता और समझता है लेकिन खुद से खुद की दूरी तय करना एक कठिन कार्य बन जाता...