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तुम्हारे जाने से पहले

  तुम्हारे जाने से पहले मेरे भीतर लौटता है डर एक संपेरे  सा उसके बंद संदूक को देखकर कांप उठती है मेरी रूह नहीं जानती हूँ उसके भीतर दुबका है कोई इनकार का अजगर या तुमने लिख भेजा है एक संदेश -जल्दी आऊंगा तुम्हारे पास तुम्हारे लौट आने की प्रतीक्षा मे एक क्षण बीतता है कल्प सा बार बार नजरें देख आती है एक अदृश्य रास्ता जिस पर लौटने का कोई निशान नहीं है फिर भी तुम्हारे शब्दों पर एतबार करती हूँ तुम्हे इस बार आने पर बताउंगी तुम्हारे लौट आने मे शामिल है मेरा खुद में लौट आना शहर भर के चरागों का आँखों मे झक से जल जाना गुलमोहर के फूलों सी तुम्हारी यादें छू जाती हैं मेरे मन को एक दिन ज़ब तुम लौट जाओगे उसी घर जाने वाले रास्ते की ओर मेरी दो आँखे छूट जाएगी तुम्हारे पास तुम्हारी याद का अजगर मुझे कसेगा रोज धीरे धीरे ज़ब तक छूट नहीं जाती मेरी आत्मा तुम्हारे ही भीतर फिर नहीं गढ़नी होगी तुम्हे मेरे लिए प्रेम की कोई भाषा नहीं खींचनी होगी कोई रेखा मेरे और तुम्हारे बीच समय भी मेरी तरह एक दिन थक कर लग जायेगा तुम्हारे गले और बचा लेगा प्यार की आखिरी उम्मीद को। गरिमा सिंह...